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पुतली का आकार और बुद्धिमत्ता

हते हैं कि आंखें दिल की ज़ुबां होती हैं। लेकिन हाल ही में किए गए अध्ययन से पता चलता है कि ये हमारे मस्तिष्क का हाल भी बयां करती हैं। आंखों की पुतलियां न सिर्फ प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया देती हैं बल्कि उत्तेजना, रुचि तथा मानसिक थकावट के संकेत भी देती हैं। कई खुफिया एजेंसियां झूठ पकड़ने के लिए भी इनका उपयोग करती हैं।

पुतली आंख के बीच स्थित काले गोलाकार भाग को कहते हैं। इसका आकार लगभग 2 से 8 मिलीमीटर होता है। यह पुतली परितारिका नामक रंगीन क्षेत्र से घिरी होता है जो पुतली के आकार को नियंत्रित करता है।

इस विषय में जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी में किए गए अध्ययन से पता चला है कि पुतली का मूल आकार बुद्धिमत्ता से निकट सम्बंध दर्शाता है। तार्किकता, एकाग्रता और स्मृति जांच में पाया गया कि जितनी बड़ी पुतली, उतनी ही अधिक बुद्धि। तीन अध्ययनों में किए गए संज्ञानात्मक परीक्षणों में सबसे अधिक और सबसे कम अंक प्राप्त करने वाले लोगों की पुतली के आकार में स्पष्ट अंतर देखे गए हैं।

इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पुतली के फैलाव की तकनीक का उपयोग किया। पुतली के आकार और बुद्धि के बीच के सम्बंध को समझने के लिए एटलांटा समुदाय के 18 से 35 वर्षों के 500 से अधिक लोगों पर अध्ययन किया गया। इसके बाद उन्होंने शक्तिशाली कैमरा और कंप्यूटर से लैस ऑई ट्रैकर की मदद से उनकी पुतली के आकार का मापन किया। इस प्रक्रिया में प्रतिभागियों को लगभग चार मिनट तक कंप्यूटर का खाली स्क्रीन देखने को कहा गया और इस दौरान उनकी पुतली की स्थिर अवस्था को मापा गया। इसके आधार पर प्रत्येक प्रतिभागी की पुतली के औसत आकार की गणना की गई। तेज़ रोशनी में पुतलियां सिकुड़ जाती हैं, इसलिए अध्ययन के दौरान रोशनी मंद रखी गई।              

अध्ययन के अगले भाग में प्रतिभागियों की ‘तरल बुद्धिमत्ता’ (नई समस्याओं के प्रति तर्क करने की क्षमता), ‘कामकाजी स्मृति क्षमता’ (एक समय अवधि तक किसी जानकारी को याद रखने की क्षमता) और ‘एकाग्रता नियंत्रण’ (खलल की स्थिति में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता) को मापने के लिए कई संज्ञानात्मक परीक्षण किए गए।

उदाहरण के तौर पर, प्रतिभागियों को कंप्यूटर स्क्रीन के एक सिरे पर बड़े से टिमटिमाते तारे से ध्यान बचाते हुए स्क्रीन के विपरीत सिरे पर एक अक्षर की पहचान करना थी। यह अक्षर कुछ ही क्षणों के लिए प्रकट होता था, इसलिए क्षण भर भी इस टिमटिमाते तारे की ओर ध्यान दिया तो अक्षर नहीं देख पाएंगे। गौरतलब है कि मनुष्य में परिधीय दृष्टि से गुज़रने वाली वस्तुओं पर प्रतिक्रिया करने की प्रवृत्ति होती है लेकिन इस कार्य में अक्षर पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया गया था।     

शोधकर्ताओं ने पाया कि पुतली का मूल आकार तरल बुद्धिमत्ता, एकाग्रता नियंत्रण, और कुछ हद तक कामकाजी स्मृति क्षमता से जुड़ा है। पुतली का आकार उम्र के साथ घटता जाता है। विश्लेषण में इस बात का ध्यान रखते हुए भी यह सम्बंध बना रहता है।

सवाल है कि पुतली के आकार का सम्बंध बुद्धि से कैसे है? शोधकर्ताओं का मानना है कि पुतली का आकार मस्तिष्क के ऊपरी स्टेम में स्थित लोकस कोर्यूलियस की गतिविधि से सम्बंधित है। यह मस्तिष्क के अन्य हिस्सों से तंत्रिकाओं के माध्यम से जुड़ा होता है। लोकस कोर्यूलियस एक रसायन नॉरएपिनेफ्रिन मुक्त करता है जो मस्तिष्क और शरीर में तंत्रिका-संप्रेषक और हॉर्मोन के रूप में कार्य करता है। इसके साथ ही यह अनुभूति, एकाग्रता, सीखने और स्मृति जैसी प्रक्रियाओं को भी नियंत्रित करता है। यह मस्तिष्क की गतिविधियों का समन्वय भी करता है ताकि मस्तिष्क के दूरस्थ क्षेत्र चुनौतीपूर्ण कार्यों और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मिलकर काम कर सकें।

लोकस कोर्यूलियस के काम में गड़बड़ी की वजह से मस्तिष्क के कार्यों में समन्वय अस्त-व्यस्त हो जाता है। इसका सम्बंध अल्ज़ाइमर एवं एकाग्रता के अभाव से देखा गया है। मस्तिष्क की गतिवधियों में समन्वय बहुत महत्वपूर्ण है और मस्तिष्क अपनी अधिकांश ऊर्जा इसको बनाए रखने में खर्च करता है।

एक परिकल्पना यह है कि जिन लोगों में पुतलियों का आकार बड़ा होता है उनमें लोकस कोर्यूलियस की गतिविधि भी अधिक होती है जो संज्ञानात्मक प्रदर्शन के लिए लाभदायक है। फिर भी बड़े आकार की पुतलियों और बुद्धि का सम्बंध समझने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है। आंखों में अभी काफी रहस्य हैं जिनको अभी और गहराई से समझना है। (स्रोत फीचर्स)

नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
Photo Credit : https://static.scientificamerican.com/sciam/cache/file/97F3CE9C-EDB4-4C0C-B23D057CDC68862F_source.jpg?w=590&h=800&A90F233A-5D00-4BF7-92495D9BA669630D

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