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ग्लेशियरों के सिकुड़ने से हिम झीलें बढ़ती हैं

डॉ. डी. बालसुब्रमण्यन, सुशील चंदानी

ग्लेशियर (Glaciers), पहाड़ों पर सघन रूप से जमी बर्फ के विशाल और मोटे आवरण होते हैं। ग्लेशियर गुरुत्वाकर्षण (gravity) और अपने स्वयं के वज़न के कारण खिसकते/ढहते रहते हैं; इस प्रक्रिया में रगड़ (friction) के चलते चट्टान (rock) टूट-फूट जाती हैं और मोरैन (Moraine) नामक मिश्रण में बदल जाती है। मोरैन में कमरे के आकार के बड़े-गोल पत्थरों (stones) से लेकर पत्थरों का बेहद महीन चूरा (rock flour) तक शामिल होते हैं। मोरैन ग्लेशियर के किनारों (edges) और अंतिम छोर पर जमा होता जाता है। 

जब बर्फ (ice) पिघलने से ग्लेशियर सिकुड़कर पीछे हटते हैं तो वहां बना विशाल और गहरा गड्ढा (depression) पानी (water) से भर जाता है। ग्लेशियर के अंतिम छोर पर जमा मोरैन (moraine) अक्सर झील (lake) बनने के लिए एक प्राकृतिक बांध (natural dam) के रूप में काम करता है। इस तरह बनीं ग्लेशियर झीलें (glacial lakes) रुकावट के रूप में काम करती हैं – वे पिघलती हुई बर्फ (meltwater) से आने वाले पानी के प्रवाह (water flow) को नियंत्रित करती हैं। ऐसा प्रवाह अनियंत्रित हो तो झीलों के नीचे की ओर रहने वाले समुदायों (communities) को मुश्किलें हो सकती हैं। 

आसमान से भी नीला 

ग्लेशियर झीलों (glacial lakes) का नीला रंग (blue color) काफी हैरतअंगेज़ हो सकता है। इसकी थोड़ी तुलना ऐसे स्वीमिंग पूल (swimming pool) से की जा सकती है जिसका पेंदा नीला पेंट किया गया हो। यह प्रभाव झील के पानी (lake water) में निलंबित पत्थरों के चूरे (rock flour) के महीन कणों द्वारा प्रकाश (light) के प्रकीर्णन (scattering) के कारण होता है। हिमालय क्षेत्र (Himalayan region) में भी फिरोज़ी रंग की कुछ ग्लेशियर झीलें (glacial lakes) देखने को मिलती हैं। 

शांत गुरुडोंगमार झील (Gurudongmar Lake) उत्तरी सिक्किम (North Sikkim) में समुद्र तल से 5430 मीटर की ऊंचाई (altitude) पर स्थित है, और यह दुनिया की सबसे ऊंची झीलों (highest lakes) में से एक है। मोरैन-बांध (moraine dam)-वाली इस झील से निकली जल धाराएं (water streams) आगे जाकर तीस्ता नदी (Teesta River) बनाती है। पैंगोंग त्सो झीलों (Pangong Tso) की 134 किलोमीटर की शृंखला (lake chain) है जो लद्दाख (Ladakh) और चीन (China) के बीच विवादित बफर ज़ोन (buffer zone) का हिस्सा है। सिक्किम (Sikkim) में समुद्र तल से लगभग 4300 मीटर की ऊंचाई (altitude) पर स्थित बहुचर्चित सामिति झील (Samiti Lake) कंचनजंगा (Kangchenjunga) के रास्ते में पड़ती है। 

बाढ़ का प्रकोप (Flooding) 

गर्माती दुनिया (Global Warming) का एक उल्लेखनीय परिणाम ग्लेशियरों का (pihalna) सिकुड़ना है, जो ग्लेशियर झीलों (glacial lakes) में पानी (water) में काफी इज़ाफा करता है। इससे इन झीलों (lakes) के मोरैन बांधों (moraine dams) के टूटने (breakage) की संभावना बढ़ जाती है और इसके परिणाम भयावह (disastrous) हो सकते हैं। 

सिक्किम की कई मोरैन-बांधित ग्लेशियर झीलों (moraine-dammed glacial lakes) में से एक है दक्षिणी ल्होनक झील (Southern Lhonak Lake)। इसने दिखा दिया है कि बढ़ते तापमान (temperature rise) के क्या परिणाम हो सकते हैं। दक्षिणी ल्होनक झील में तीन ग्लेशियरों (glaciers) का पानी जमा होता है। ग्लोबल वार्मिंग (global warming) के कारण इस झील का आयतन (volume) असामान्य रूप से तेज़ी से बढ़ा है। झील (lake) बहुत हाल ही में बनी है – 1962 में यह पहली बार उपग्रह चित्रों (satellite images) में दिखाई दी थी। 1977 में यह मात्र 17 हैक्टर में फैली थी और यह बढ़ती हुई झील तब से एक संभावित खतरे (threat) के रूप में देखी जा रही थी। 2017 तक, झील (lake) से लगातार पानी निकालने के लिए आठ इंच व्यास (diameter) वाले तीन पाइप (pipes) लगाए गए थे। लेकिन वे भी निहायत अपर्याप्त साबित हुए थे। 

2023 तक झील का क्षेत्रफल (area) 167 हैक्टर हो जाना था। पिछले साल हुई बारिश (rain) के कारण मोरैन बांध (moraine dam) टूट गया। परिणामस्वरूप झील (lake) के फटने से तीस्ता नदी (Teesta River) का जल स्तर (water level) छह मीटर बढ़ गया, और तीस्ता-III बांध (Teesta-III Dam) टूट गया और व्यापक पैमाने पर विनाश (devastation) हुआ। 

आईआईटी, रुड़की (IIT Roorkee) और अन्य वैज्ञानिकों (scientists) द्वारा इस झील से भविष्य में होने वाले विस्फोट (explosion) की मॉडलिंग (modeling) कर यह अनुमान लगाया गया है कि मोरैन में आई एक बड़ी दरार (crack) से इससे 12,000 घन मीटर प्रति सेकंड (cubic meters per second) से अधिक की गति से पानी (water) बह सकता है – इससे झील के नीचे की ओर बसी मानव बस्तियों (human settlements) के लिए स्थिति बहुत ही भयावह (severe) होने की संभावना है। इस पर सतत निगरानी (monitoring) आपदा न्यूनीकरण (disaster mitigation) में, और प्रकृति के इन रहस्यमय नीले चमत्कारों (mystical blue wonders) को समझने में मदद करेगी। (स्रोत फीचर्स)

नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
Photo Credit : https://th-i.thgim.com/public/news/national/v9j3bw/article68819806.ece/alternates/LANDSCAPE_1200/lhonak_change.jpg

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