डॉ. इरफान ह्यूमन

नासा का स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस-SLS) रॉकेट और ओरायन अंतरिक्ष यान 17 जनवरी, 2026 को आर्टेमिस-2 मिशन (Artemis 2 mission) के लिए लॉन्च पैड पर पहुंच गया है। हालांकि, इस मिशन के लॉन्च की तारीख अभी भी अनिश्चित है। यह रोलआउट आर्टेमिस-2 की अंतिम तैयारी का शुरुआती चरण है। यह पहला क्रूड एसएलएस/ओरायन मिशन है और दिसंबर 1972 के बाद पहली बार मनुष्य को पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट – Low earth orbit) से आगे ले जाने वाली अंतरिक्ष उड़ान बनने को तैयार है। चार अंतरिक्ष यात्री, रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैंसेन, इस दस दिवसीय मिशन पर चंद्रमा के चारों ओर घूमेंगे।
पहले होंगे पूर्वाभ्यास
लॉन्च पैड पर पहुंचने के बाद, यात्री वाहन की तकनीकी जांच और परीक्षण किए जा रहे हैं, जिसमें रेडियो-फ्रीक्वेंसी इंटरफरेंस टेस्ट (radio frequency interference test) शामिल हैं, जो वीएबी के अंदर नहीं किए जा सकते। वीएबी यानी व्हीकल असेंबली बिल्डिंग (Vehicle Assembly Building) नासा का वह विशाल भवन है जहां रॉकेट और अंतरिक्ष यान असेंबल किए जाते हैं। आर्टेमिस-2 के अंतरिक्ष यात्री पैड पर इमरजेंसी एस्केप प्रक्रियाओं का पूर्वाभ्यास भी करेंगे। इसमें सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण होगा वेट ड्रेस रिहर्सल, जिसमें एसएलएस को लिक्विड ऑक्सीजन और लिक्विड हाइड्रोजन जैसे ईंधन से भरा जाएगा और एक प्रैक्टिस उल्टी गिनती की जाएगी, जो टी-माइनस 29 सेकंड पर रुक जाएगा। रिहर्सल में सब कुछ असली प्रक्षेपण जैसा ही होगा, लेकिन उड़ान नहीं होगी।
नासा ने 2022 में आर्टेमिस-1 (Artemis 1) के लॉन्च से पहले तीन वेट ड्रेस रिहर्सल (wet dress rehearsal) किए थे और हाइड्रोजन लीक (hydrogen leak) जैसी समस्याओं के कारण दो लॉन्च प्रयास रद्द कर दिए थे। आर्टेमिस-1 से मिले सबक आर्टेमिस-2 की सफलता की संभावना बढ़ाएंगे।
प्रक्षेपण तिथि
वेट ड्रेस रिहर्सल लॉन्च की तारीख तय करने में मुख्य कारक होगी। हालांकि नासा 6 से 11 फरवरी को लक्ष्य बना रहा है, लेकिन एजेंसी ने औपचारिक प्रक्षेपण तारीख घोषित नहीं की है। अगर प्रक्षेपण 11 फरवरी तक नहीं हुआ, तो अगला मौका मार्च की शुरुआत में ही बनेगा।
जटिल कारक
प्रक्षेपण में एक रोड़ा है नासा का क्रू-12 लॉन्च (Crew-12 mission), जो फिलहाल 15 फरवरी से पहले नहीं होगा। क्रू-11 की 15 जनवरी को स्टेशन से जल्द वापसी ने एजेंसी को तैयारी तेज़ करने को प्रेरित किया।
हालांकि नासा प्रशासक जेरेड इसाकमैन का कहना है कि आर्टेमिस-2 और क्रू-12 स्वतंत्र अभियान हैं, लेकिन अधिकारियों ने संभावित टकराव स्वीकार किया है। दोनों के ट्रैकिंग एंड डैटा रिले सैटेलाइट नेटवर्क (Tracking and Data Relay Satellite System – TDRSS) तक पहुंच और लॉन्च साइट्स के संसाधन साझा हैं। दोनों को एक साथ लॉन्च करना समझदारी नहीं है। लेकिन नासा दोनों की तैयारी जारी रखेगा। जिसमें भी कोई समस्या आएगी वो टलेगा या प्रक्षेपण के लिए दोनों में से एक को चुनना पड़ेगा।
आर्टेमिस-1 से एक बदलाव यह है कि नासा ने मोबाइल प्रक्षेपण प्लेटफॉर्म (mobile launch platform) पर कामकाजी प्लेटफॉर्म जोड़े हैं ताकि सिस्टम हार्डवेयर का पुन:परीक्षण पैड पर ही हो सके। अर्थात यदि पहला प्रक्षेपण सफल नहीं होता, तो यान को वीएबी में वापस रोल न करना पड़े, यह अगले प्रक्षेपण तक वहीं बना रहे।
अधिकारी यह भी कहते हैं कि वे बाहरी दबावों से सतर्क हैं जो ‘लॉन्च फीवर’ पैदा कर सकते हैं, जिसमें जनता और राजनीतिक स्वार्थ और दबाव शामिल हैं। कार्यकारी सहायक प्रशासक लकीशा हॉकिंस ने बताया कि राजनीतिक दबाव उनके मन में मिशन के प्रति रुचि और उत्साह का एक स्रोत है। दूसरी ओर, एजेंसी का ध्यान इस बात पर है कि प्रक्षेपण क्रू के लिए सही और सुरक्षित रहे।
आर्टेमिस-2 के उपकरण
आर्टेमिस-2 में कई वैज्ञानिक उपकरण और प्रयोग शामिल हैं जो अंतरिक्ष पर्यावरण, विकिरण, और मानव स्वास्थ्य (space radiation, human health in space) पर प्रभाव का अध्ययन करेंगे। चूंकि अंतरिक्ष यान में जगह सीमित है, इसलिए इसमें बड़े वैज्ञानिक उपकरण नहीं हैं, बल्कि रेडिएशन सेंसर, ऑर्गन-ऑन-ए-चिप और ऑप्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम जैसे कॉम्पैक्ट डिवाइस हैं। कुछ मुख्य उपकरणों की चर्चा यहां की जा रही है।
विकिरण मॉनिटरिंग उपकरण
अंतरिक्ष में विकिरण (space radiation exposure) एक बड़ी चुनौती है, इसलिए आर्टेमिस-2 में कई सेंसर लगाए गए हैं जो विकिरण स्तर को मापेंगे। ये उपकरण अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य के मिशनों के लिए डैटा इकट्ठा करने में मदद करेंगे।
1. हाइब्रिड इलेक्ट्रॉनिक रेडिएशन असेसर्स (एचईआरए-HERA): ओरायन कैप्सूल के अंदर विभिन्न स्थानों पर छह सक्रिय विकिरण सेंसर लगाए गए हैं। ये सूर्य से उत्पन्न अंतरिक्ष मौसमी घटनाओं (जैसे सोलर फ्लेयर्स) से उत्पन्न खतरनाक विकिरण का पता लगाते हैं और चेतावनी देते हैं। अगर विकिरण अधिक हो, तो मिशन कंट्रोल अंतरिक्ष यात्रियों को शेल्टर बनाने की सलाह दे सकता है। यह आर्टेमिस-1 से सीखे गए सबकों पर आधारित है।
2. क्रू एक्टिव डोसिमीटर (crew dosimeter): प्रत्येक अंतरिक्ष यात्री को एक छोटा-सा डिवाइस दिया जाएगा, जिसे वे अपनी जेब में रखेंगे। यह व्यक्तिगत विकिरण एक्सपोज़र को मापता है। आर्टेमिस-1 में मैनेक्विन पर इसका उपयोग किया गया था, लेकिन अब पहली बार क्रू के साथ लो अर्थ ऑर्बिट से बाहर इस्तेमाल होगा।
3. एम-42 ईएक्सटी (M-42 EXT): जर्मन स्पेस एजेंसी (डीएलआर) के साथ साझेदारी में विकसित, यह एक अपडेटेड विकिरण सेंसर है जो ओरायन में लगाया जाएगा। यह आर्टेमिस-1 के एम-42 का उन्नत संस्करण है और विकिरण के प्रभाव को और बेहतर तरीके से माप सकेगा।
4. आर्चर प्रणाली (ARCHER system): आर्चर एक व्यापक प्रणाली है जो विकिरण स्तर को मॉनिटर करती है और क्रू की स्वास्थ्य स्थिति पर इसके प्रभाव का अध्ययन करती है। यह आंतरिक और बाहरी विकिरण को ट्रैक करेगी।
ऑर्गन–ऑन–ए–चिप
एवेटार (ए वर्चुअल एस्ट्रोनॉट टिशू एनालॉग रेस्पॉन्स) एक क्रांतिकारी प्रयोग है जिसमें यूएसबी ड्राइव जितने छोटे ‘ऑर्गन-ऑन-ए-चिप’ उपकरण का उपयोग किया जाएगा। ये उपकरण मानव ऊतकों की नकल करते हैं और विकिरण तथा माइक्रोग्रैविटी (microgravity) के प्रभाव का अध्ययन करेंगे। मसलन, ये गुर्दे या फेफड़ों पर बढ़ते विकिरण का असर देखेंगे। यह पहली बार है जब ऐसी तकनीक वैन एलन बेल्ट (Van Allen belts) से बाहर इस्तेमाल होगी। अंतरिक्ष यात्री इन उपकरणों से रीयल-टाइम डैटा इकट्ठा करेंगे, जो अलगाव और सीमित स्थान के प्रभाव को भी मापेंगे।
ऑप्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम
ओरायन आर्टेमिस-2 ऑप्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम (optical communication system – ओ2ओ) एक लेज़र-आधारित संचार प्रणाली (laser communication) है जो पृथ्वी से उच्च गति डैटा ट्रांसफर करेगी। इसमें एक 4-इंची टेलीस्कोप, दो गिंबल्स, मॉडेम और कंट्रोल इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं। यह पारंपरिक रेडियो संचार से तेज़ है और भविष्य के मिशनों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
कैमरा और इमेजिंग उपकरण
हाई-एंड हैसलब्लाड और निकॉन डिजिटल कैमरे (Hasselblad camera, Nikon space camera) चंद्रमा की उच्च-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें लेंगे, जो पहले के मिशनों से बेहतर होंगी।
जैविक प्रयोग
आर्टेमिस-2 में कुछ जैविक नमूने ले जाए जा सकते हैं। खमीर, हरी शैवाल, कवक और बीजों पर विकिरण के प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा। ये प्रयोग डीएनए पर अंतरिक्ष यात्रा के असर को समझने (DNA damage in space) में मदद करेंगे।
अंतरिक्ष यात्री विशेष कागज़ पर लार एकत्र करेंगे, क्योंकि रेफ्रिजरेशन उपलब्ध नहीं होगा। यह स्वास्थ्य और तनाव से जुड़े बायोमार्कर्स (biomarkers) का अध्ययन करेगा। साथ ही, नींद, तनाव और अलगाव के प्रभाव के अध्ययन लिए शारीरिक और व्यवहारगत डैटा भी इकट्ठा किया जाएगा। ये उपकरण मंगल जैसे लंबे मिशनों के लिए महत्वपूर्ण डैटा देंगे।
आर्टेमिस-2 दशकों बाद पहला ऐसा मिशन है जहां इंसान चंद्रमा के करीब (human return to the Moon) पहुंचेंगे। (स्रोत फीचर्स)
नोट: स्रोत में छपे लेखों के विचार लेखकों के हैं। एकलव्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।
Photo Credit : https://www.nasa.gov/wp-content/uploads/2026/01/jsc2023e016432-alt2orig-e1768648654351.jpg?resize=1536,1082








